Tuesday, August 16, 2011

Across the country angry at the arrest of Anna

Anna Hazare agitating for the Ombudsman's 16 August (Tuesday) against the arrest emerged nationwide outrage. Anna's people took to the streets demanding immediate release. More strongly opposed to Anna's home state of Maharashtra. Bihar, Bengal, Assam and Orissa in India Against Corruption Ó by picketing at various locations under the banner of protest to the arrest of Anna. "I am Anna Hazare Ó or Ó m Anna Hazare wrote slogans against Gandhi cap space Anna supporters - rather rallies. In various districts of Uttar Pradesh, including Lucknow, movement and protest against the arrest of Anna - were performed. Bihar, Patna, Purnia, Muzaffarpur and Bhagalpur continued series of protests in other districts. Actor Manoj Tiwari has also expressed opposition supporters. Trains stopped in Rohtas Anna supporters show their anger. Ranchi, performing in more than 55 people were detained. The black bands tied in Assam. Performed by people in Jammu. Anna supporters Jammu - Srinagar national highway was blocked Satwari Square Road. MP was performed in all cities. Southern states of Tamil Nadu, Karnataka and Kerala in the day's round of demonstrations. In Kerala, social workers, writers, artists and even the salaried people to attend rallies and marches in support of Anna has.
This protest - display does not tell the people how badly entangled in the quagmire of corruption wire - have been wired. People want to get rid of it in some form.It will not take bribes. Anna Hazare's holy crusade will succeed only if it not only
Kpolkalpit movement will become.

Dr. Rajiv Ranjan Thakur

क्या खत्म होगा भ्रष्टाचार !अन्ना की गिरफ्तारी पर देशभर में गुस्सा

मजबूत लोकपाल के लिए आंदोलनरत अन्ना हजारे की 16 अगस्त (मंगलवार) को गिरफ्तारी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आक्रोश उभरा। अन्ना की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए। अन्ना के गृह प्रदेश महाराष्ट्र में विरोध ज्यादा पुरजोर रहा। बिहार, बंगाल, असम और उड़ीसा में 'इंडिया अगेंस्ट करप्शनÓ के बैनर तले विभिन्न स्थानों पर धरना देकर अन्ना की गिरफ्तारी का विरोध जताया गया। 'आइ एम अन्ना हजारेÓ या 'मी अन्ना हजारेÓ नारे लिखी गांधी टोपी लगाए अन्ना समर्थकों ने जगह-जगह रैलियां निकालीं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत विभिन्न जिलों में भी अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन व विरोध-प्रदर्शन किया गया। बिहार के पटना, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर सहित अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन का सिलसिला चलता रहा। अभिनेता मनोज तिवारी ने भी समर्थकों के साथ विरोध व्यक्त किया। रोहतास में अन्ना समर्थकों ने ट्रेनें रोककर अपना गुस्सा प्रदर्शित किया। झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे 55 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। असम में लोगों ने काली पट्टियां बांधी। जम्मू में भी लोगों ने प्रदर्शन किया। अन्ना समर्थकों ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के सतवारी चौक पर सड़क जाम कर दिया। मप्र के सभी शहरों में प्रदर्शन हुआ। दक्षिणी प्रांतों तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में भी दिन भर प्रदर्शनों का दौर रहा। केरल में सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, कलाकार और यहां तक कि नौकरीपेशा लोग भी अन्ना के समर्थन में जुलूस और रैलियों में शिरकत करते नजर आए।
क्या यह विरोध-प्रदर्शन यह नहीं बताता है कि लोग भ्रष्टाचार के दलदल में फंसकर किस कदर तार-तार हो चुके हैं। लोग किसी न किसी रूप में इससे मुक्ति पाना चाहते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब कि लोग दिल से कसम खाऐंगे कि देश से इस कोढ़ को मिटाने के लिए तन-मन-धन से स्वयं को समर्पित करेंगे। घूस ना लेंगे ना देंगे। तभी अन्ना हजारे का यह पवित्र मुहिम सफल हो पाएगा अन्यथा यह केवल
कपोलकल्पित आन्दोलन ही बनकर रह जाऐगा।

डॉ राजीव रंजन ठाकुर

Friday, July 15, 2011

Pak should take action against 26/11 terrorist

Conspirator in the 2008 Mumbai terror attacks in Pakistan, Lashkar - e - Taiba leaders should sue. India and Pakistan with U.S. officials on peace should make every effort to give advice. Even if the July 13 attack that was hatched in Pakistan or not, but for him to take action against perpetrators of 26/11 is the most appropriate time.If the attack was an arm of the Indian Mujahideen, Indian leaders, India - Pak talks will be reduced to stop immediately. Meanwhile, India's financial capital Mumbai serial bomb blast on Wednesday in a news world dominated all media.

Dr rr thakur
09431277525

मुंबई के गुनाहगारों के खिलाफ कार्रवाई करे पाकिस्तान

पाकिस्तान को वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ता लश्कर-ए-तैयबा के नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहिए। साथ ही अमेरिकी अधिकारियों को हिंदुस्तान और पाकिस्तान को शांति स्थापित करने संबंधी सलाह देने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए। भले ही 13 जुलाई के इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई हो या नहीं, लेकिन उसके लिए 26/11 के साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का यह सबसे उपयुक्त समय है। पाकिस्तान को यह स्पष्ट कर कर देना चाहिए कि भारत के साथ सद्भावना दिखाने और बातचीत को पटरी पर लाने का यह सबसे सही वक्त है। अगर जांच में पाया गया कि इस बार भी हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठे लश्कर ने रची है तो भारतीय नेतृत्व अपने पड़ोसी के साथ हाल में बहाल हुई बातचीत को फिर से रोकने पर मजबूर हो जाएगा। अगर हमले में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ पाया गया तो भारतीय नेताओं पर भारत-पाक वार्ता तत्काल रोकने का दबाव कम होगा। उधर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट की खबर दुनियां से सभी मीडिया में भी छाई रही।

Dr rr thakur
bhagalpur
09431277525

Saturday, April 23, 2011

इतिहास का साक्षी लाजपत पार्क बहा रहा आंसू

भागलपुर के मध्य में स्थित लाजपत पार्क जो जंगे आजादी के दिनों से लेकर आज तक इतिहास के कई अध्यायों का गवाह रहा है। स्वतंत्रता सेनानी दीपनारायण सिंह ने 30 एकड़ जमीन दान में देकर तात्कालिन तड़वन्ना में लाजपत पार्क की नींव रखी। दीप बावू ने पंजाब केशरी लाला लाजपत राय जिनको 1928 ई. में साइमन कमीशन का विरोध करने को लेकर लाहौर में अंगे्रजी हुकूमत के आदेश पर बर्बरता पूर्वक पीटा गया। जिसको लेकर तत्कालीन भारतवर्ष में एक भूचाल सा आ गया और इसी पिटाई के बाद लाला लाजपत राय की मौत हो गयी थी,के सम्मान में आजादी के दिवानों के लिए एक प्लेटफार्म के रूप में विकसित किया। यहां आजादी के दिवानों ने 'इंकलाव जिंदावादÓ, 'अंग्रेजों भारत छोड़ोÓ के नारों को बुलंदी दी।
सन् 1934 ई. में प्रलयंकारी भूकंप के बाद जब महात्मा गांधी यहां आए तो इसी पार्क में उन्होंने जनता को अपना संदेश दिया था। 1942 ई.के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजी वस्त्रों की होलीका भी यहीं जलाई गयी थी। जंगे आजादी के दिनों में नेताजी सुभाषचंद्र बोस, खान अब्दुल गफ्फार खां, आचार्य कृपलानी, सरोजनी नायडू, डा. राजेन्द्र प्रसाद आदि ने इसी पार्क में विशाल जन समूह को संबोधित किया था।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सन 1974 ई. के आदोलन में जय प्रकाश नारायण ने नौजवानों को 'जाग रे तरूणाईÓ का संदेश यहीं दिया था। कई दफा आम चुनावों में अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी सरीखे नेताओं ने इसी मैदान में विशाल जनसमूह को संबोधित किया। वहीं इतिहास की गाथा कहलाने वाली इस पावन धरती को प्रशासन की उदासीनता ने जानवरों का चारागाह में तब्दील कर दिया है। इस पार्क में सालाना आयोजित होने वाले मेले, सर्कस, मीना बाजार, डिज्नीलैंड आदि से लिए गए कर जो कि नगर निगम वसूलती है का आधा हिस्सा भी इसके सौन्दर्यीकरण के नाम पर खर्च करता तो इतिहास का साक्षी यह मैदान अपनी दयनीय स्थिति पर आंसू नहीं बहाता।

डा. राजीव रंजन ठाकुर
भागलपुर

Saturday, April 9, 2011

Gandhigiri relevant today

Anna Hazare's campaign was successful in delivering their message to the world. on 1930-1931 Gandhi's civil disobedience movement,after independence in 1977, Jayaprakash Narayan's movement show a glimpse of Anna Hazare in the nonviolence movement. The whole country stood with them. The one thing that emerged to lead the country right earring to what extent so-called public representatives have been hollow. They should have forced him to work the person had to be a Gandhian. Movement of people of all sections attachement tells what extent corruption Rupee leech sucks blood to all sections of the people that he was not able to revolt. Order problems associated with corruption. Its roots are very deep. After a gap to merge the whole world saw that all effective weapons today is how Gandhi and his principles.
Today the whole world is struggling to battle on every front is rough for them in Anna that this campaign is a sign that the issue no matter determined through the most trusted on anything you decided your bike and the target should not be activated to achieve success Acumeangee your step. Similarly, the act now - just Team India captain Mahendra Singh Dhoni is also shown.
Maybe after this movement Afalafal Ombudsman appointed under the Bill passed through Fiarkaparast some people are built like strangulation of democratic faith. Ombudsman under the guise of preparing to clamp down on the power of nature and autocracy and centralisation of power. After Bill passed only some of the Ombudsman's appointment is not to be. People need to truly swear that the corruption of minds with myself all the way to eliminate the person and purpose stand in opposition system, would clear the covenant and Karmana. Gandhiji always used to say that the utterances and actions to act in synergy with the true will succeed.

Dr. Rajiv Ranjan Thakur

आज भी प्रासंगिक है गांधीगीरी

अन्ना हजारे का अभियान दुनिया में अपने संदेश को पहुंचाने में सफल रहा। स्वतंत्रतापूर्व 1930-31 में गांधीजी का सविनय अवज्ञा,स्वतंत्रता पश्चात 1977 में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन की झलक अन्ना हजारे की इस अहिंसक आंदोलन में दिखी। सारा देश उनके साथ खड़ा हो गया। इससे एक बात तो सामने आई कि आज देश को सही नेतृत्व देने बाले तथाकथित जनप्रतिनिधि किस हद तक खोखले हो चुके हैं। जिस काम को उन्हें करना चाहिए था उसे मजबूरन एक गांधीवादी व्यक्ति को करना पड़ा। आंदोलन में हर तबके के लोगों का जुडऩा यह बताता है कि भ्रष्टाचार रूपी जोंक किस कदर हर तबके के लोगों का खून चूस रहा है कि वह चाहकर भी बगावत नहीं कर पा रहा था। भ्रष्टाचार व्यवस्था से जुड़ी हुई समस्या है। इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। लंबे अंतराल के बाद सारी दुनिया ने देखा कि हर मर्ज के लिए आज भी गांधी व उनका सिद्धांत कितना कारगर अस्त्र है।
आज जब सारी दुनिया हर मोर्चे पर किसी न किसी जंग से जूझ रही है ऐसे में उनके लिए अन्ना का यह अभियान एक संकेत है कि मुद्दा चाहे कुछ भी हो अगर दृढ़ प्रतिज्ञ होकर अपने आप पर सबसे ज्यादा भरोसा कर कुछ भी ठान लें और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए क्रियाशील हो जाएं तो सफलता आपका कदम चूमेंगी। इसी तरह का कारनामा अभी-अभी टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने भी कर दिखाया है।
रही बात लोकपाल की तो यह समय ही बताएगा कि वह कितना कारगर होगा। हो सकता है कि इस आंदोलन के फलाफल के बाद पारित विधेयक के तहत नियुक्त लोकपाल के जरिए कुछ फिरकापरस्त लोग लोकतंत्र की आस्था का गला घोंटने का मन बनाए हों। लोकपाल की आड़ में सत्ता पर निरंकुशवादी प्रवृति का शिकंजा कसने की तैयारी हो और सत्ता का केंद्र्रीयकरण हो जाए। केवल विधेयक पारित कर लोकपाल की नियुक्ति से कुछ होने को नहीं है। जरूरत है लोगों को सच्चे दिल से कसम खाने की कि वह जेहन से भ्रष्टाचार को खत्म करने में खुद के साथ ही हर वैसे व्यक्ति व तंत्र के विरोध में खड़ा होकर मनसा,वाचा और कर्मणा से निर्मल होगा। क्योंकि गांधीजी हमेशा कहा करते थे कि कथनी और करनी में तालमेल के साथ कर्म करने पर ही सच्ची सफलता मिलेगी।

डॉ. राजीव रंजन ठाकुर