Showing posts with label religious information. Show all posts
Showing posts with label religious information. Show all posts

Thursday, October 27, 2016

वर्ष 2016 के धनतेरस पर राशि के अनुसार किस वस्‍तु की करें खरीदारी

मेष राशि
सूर्य की पूर्ण दृष्टि से इस राशि वालों को लोहे एवं उससे निर्मित वस्तुओं को खरीदने से बचना चाहिए। सोना, चांदी, बर्तन, गहने, हीरा, वस्त्र खरीदना शुभ होगा। चमड़ा, केमिकल आदि भी नहीं खरीदें।

वृषभ राशि
शनि की दृष्टि से सोना, चांदी, पीतल, कांसा, हीरा, कम्प्यूटर, बर्तन आदि की खरीदारी शुभ होगा। फर्टिलाइजर्स, वाहन, तेल, चमड़े एवं लकड़ी आदि से बनी वस्तुओं को खरीदने से बचें।

मिथुन राशि
मंगल की दृष्टि इस राशि पर होने से जमीन, मकान, प्लॉट आदि के सौदे के लिए लाभकारी है। पुखराज सोना, चांदी आदि खरीद सकते हैं। किसी को कर्ज न दें।

कर्क राशि
सफेद वस्तु, चांदी, इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना अच्छा रहेगा। निवेश फायदेमंद होगा। नए वाहन की खरीदी भी की जा सकती है। कपड़े, बर्तन, लकड़ी का सामान भी खरीद सकते हैं।

सिंह राशि
शनि की ढय्या होने के कारण अपने नाम के अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर खरीदारी करें तो बेहतर होगा। बच्चों को उपहार देने के लिए किसी वस्तु का खरीदना उचित होगा। सोना खरीदने से बचें। शेयर में निवेश नही करें। लोहे से बनी चीजें न खरीदें।

कन्या राशि
इस राशि में गुरु-चंद्रमा होने से गजकेसरी योग बन रहा है। इस दिन आप हीरा, सोना, जमीन आदि खरीद सकते हैं। चांदी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, फर्नीचर आदि की खरीदारी शुभ रहेगा।

तुला राशि
इस राशि वालों के लिए निवेश के लिए दिन अच्छा है। सोना, तांबा व कांसे से बनी चीजें खरीद सकते हैं।  लोहे की चीजें छोड़कर अन्य कोई भी वस्तु खरीद सकते हैं। इस दिन आप वाहन भी खरीद सकते हैं।

वृश्चिक राशि
इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। इसलिए अपने नाम से खरीदी करने से बचें। परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर खरीदारी कर सकते हैं। लोहे की वस्तुं व सोना न खरीदें। चांदी, बर्तन, पीतल, वस्त्र, खरीद सकते हैं।


धनु राशि
इस राशि वाले को जमीन-जायदाद से लाभ मिलने का योग बन रहा है। कीमती धातुओं से भी लाभ होगा। सोना, हीरा,कीमती पत्थर, पीले कपड़े, दवाई, सोना, गेहूं आदि खरीद सकते हैं।

मकर राशि
वस्त्र एवं सोना विशेष फायदा देने वाला होगा। सजावटी सामान, वाहन, किताबें, किमती नग आदि खरीद सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं न खरीदें व प्रॉपटी में निवेश न करें।

कुंंभ राशि
इस राशि वालों के लिए निवेश का समय अच्छा है। स्थाई संपत्ति भी खरीद सकते हैं। किताबें, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं, लकड़ी का समान, फर्नीचर एवं सजाने के समान खरीदने में ज्यादा रुचि होगी। सोना व कीमती पत्थर न खरीदें।

मीन राशि
स्थाई संपत्ति खरीदने के लिए दिन अच्छा है। सोने, चांदी, कीमती नग आदि खरीदने का अच्छा अवसर है। वस्त्र में लाभ होगा। शेयर न खरीदें व किसी को पैसा उधार न दें।

Friday, October 7, 2016

कलश स्थापन


किसी भी पूजन या शुभ कार्य में मंगल कामना के निहितार्थ कलश की बड़ी महिमा बताई गई है। कलश पूजन सुख व समृद्धि को बढ़ाता है। कलश स्थापन में सभी प्रमुख देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापन की पूरी अनुष्ठानिक प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण और मायने रखती है। तदुपरांत कलश में डाली जाने वाली सामग्री भी इसे अधिक पवित्र बना देती हैं।

कलश में डाली जाने वाली वस्तुएं और उनसे फायदे:-

कलश:-देव पूजन में लिया जाने वाला कलश तांबे या पीतल धातु से बना हुआ होना शुभ कहा गया है। मिट्टी का कलश भी श्रेष्ठ कहा गया है।

पंच पल्लव:-पीपल, आम, गूलर, जामुन, बड़ के पत्ते पांचों पंचपल्लव कहे जाते हैं। कलश के मुख को पंचपल्लव से सजाया जाता है। जिसके पीछे कारण है ये पत्ते वंश को बढ़ाते हैं।

पंचरत्न:-सोना, चांदी, पन्ना, मूंगा और मोती ये पंचरत्न कहे गए हैं। वेदों में कहा गया है पंचपल्लवों से कलश सुशोभित होता है और पंचरत्नों से श्रीमंत बनता है।

जल:-जल से भरा कलश देवताओं का आसन माना जाता है। जल शुद्ध तत्व है। जिसे देव पूजन कार्य में शामिल किए जाने से देवता आकर्षित होकर पूजन स्थल की ओर चले आते हैं। जल से भरे कलश पर वरुण देव आकर विराजमान होते हैं।

नारियल:-नारियल की शिखाओं में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार पाया जाता है। नारियल की शिखाओं में मौजूद ऊर्जा तरंगों के माध्यम से कलश के जल में पहुंचती है। यह तरंगें काफी सूक्ष्म होती हैं। नारियल को कलश पर स्थापित करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि नारियल का मुख यजमान की ओर हो।

सोना:-ऐसी मान्यता है कि सोना अपने आस-पास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। सोने को शुद्ध कहा जाता है। यही वजह है कि इसे भक्तों को भगवान से जोडऩे का माध्यम भी माना जाता है।

तांबे का पैसा:-तांबे में सात्विक लहरें उत्पन्न करने की क्षमता अधिक होती है। कलश में उठती हुई तरंगे वातावरण में प्रवेश कर जाती हैं। कलश में पैसा डालना त्याग का प्रतीक भी माना जाता है। यदि आप कलश में तांबे के पैसे डालते हैं, तो इसका मतलब है कि आपमें सात्विक गुणों का समावेश हो रहा है।

सात नदियों का पानी:-गंगा, गोदावरी, यमुना, सिंधु, सरस्वती, कावेरी और नर्मदा नदी का पानी पूजा के कलश में डाला जाता है। अगर सात नदियों के जल की व्यवस्था नहीं हो तो केवल गंगा का जल का ही उपयोग करें। यदि वह भी उपलब्ध नहीं हो तो सरलता से जो भी जल प्राप्त हो उसे ही सात नदियों का जल मानकर कलश में भरें।

सुपारी:-यदि हम जल में सुपारी डालते हैं, तो इससे उत्पन्न तरंगें हमारे रजोगुण को समाप्त कर देती हैं और हमारे भीतर देवता के अच्छे गुणों को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है।

पान:-पान की बेल को नागबेल भी कहते हैं। नागबेल को भू लोक और ब्रह्मलोक को जोडऩे वाली कड़ी माना जाता है। इसमें भूमि तरंगों को आकृष्ट करने की क्षमता होती है। साथ ही इसे सात्विक भी कहा गया है।

दूर्वा:-दूर्वा हरियाली का प्रतीक है। कलश में दूर्वा को डाला जाना जीवन में हरियाली यानी खुशियां बढ़ाता है।

कलश पूजन व स्थापना की विधि
-----------------------
सबसे पहले पूूजन किए जाने वाले स्थान को साफ कर लें। वहां एक लगड़ी का पाटा रखें जिस पर हल्दी और कुमकुम से कोई शुभ मांगलिक चिह्न बनाएं। इस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। अब सबसे पहले श्रीगणेश की मूर्ति स्थापित करें। देव स्थापना करें। अब कलश स्थापित करें। दीपक स्थापित करें। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कलश देव मूर्ति के दाहिनी ओर स्थापित किया गया हो। कलश की स्थापना चावल या अन्न की ढेरी पर करें।

कलश पूजन के समय इस मंत्र का जप किया जाना चाहिए:-
कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाश्रिता: मूलेतस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मात्र गणा स्मृता:।
कुक्षौतु सागरा सर्वे सप्तद्विपा वसुंधरा,
ऋग्वेदो यजुर्वेदो सामगानां अथर्वणा:
अङेश्च सहितासर्वे कलशन्तु समाश्रिता:।

अर्थात कलश के मुख में संसार को चलाने वाले श्री विष्णु, कलश के कंठ यानी गले में संसार को उत्पन्न करने वाले श्री शिव और कलश के मूल यानी की जड़ में संसार की रचना करने वाले श्री ब्रह्मा ये तीनों शक्ति इस ब्रह्मांड रूपी कलश में उपस्थित हैं। कलश के बीच वाले भाग में पूजनीय मातृकाएं उपस्थित हैं। समुद्र, सातों द्वीप, वसुंधरा यानी धरती, ब्रह्माण्ड के संविधान कहे जाने वाले चारों वेद इस कलश में स्थान लिए हैं। इन सभी को मेरा नमस्कार हैं।

 इसके बाद उक्त मंत्रों से वरुण देव को नमस्कार करें:-
ऊँ अपां पतये वरुणाय नम:।
इन मंत्रों के साथ कलश पूजन करें। कलश पर गंध, पुष्प्प और चावल अर्पित करें।

Saturday, November 7, 2015

उक्‍त पांच काम करने से रूठ जाती है लक्ष्‍मी

उक्‍त पांच काम करने से रूठ जाती हैं देवी लक्ष्मी

इस भैतिकवादी समय में हर कोई चाहता है कि देवी लक्ष्मी की कृपा उस पर बनी रहे क्योंकि जिस पर भी देवी लक्ष्मी की कृपा होती है उसके पास जीवन की हर सुख-सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। जीवन का हर सुख उसे प्राप्त होता है। यही कारण है कि लोग देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नित नए उपाय करते हैं।


Garuda Purana- Don't do these five works, Goddess Lakshmi will angry
 गरुड़ पुराण के अनुसार उक्‍त्‍ पांच काम करने से देवी लक्ष्मी मनुष्य तो क्या स्वयं भगवान विष्णु का भी त्याग कर देती हैं। इसलिए इन 5 कामों से बचना चाहिए। ये काम इस प्रकार हैं-

श्लोक
कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं ब्रह्वाशिनं निष्ठुरवाक्यभाषिणम्।
सूर्योदये ह्यस्तमयेपि शायिनं विमुञ्चति श्रीरपि चक्रपाणिम्।।

अर्थात्- 1. मैले वस्त्र पहनने वाले, 2. दांत गंदे रखने वाले, 3. ज्यादा खाने वाले, 4. निष्ठुर (कठोर) बोलने वाले, 5. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाले स्वयं विष्णु भगवान हों तो उन्हें भी देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं।

1. मैले कपड़े पहनना
गरुड़ पुराण के अनुसार मैले वस्त्र यानी गंदे कपड़े पहनने वालों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं। यदि आप साफ-स्वच्छ रहेंगे तो लोग आपसे मिलने-जुलने में संकोच नहीं करेंगे। आपकी जान-पहचान बढ़ेगी। यदि आप कोई व्यापार करते हैं तो जान-पहचान बढ़ने से आपके व्यापार में भी इजाफा होगा। अगर आप नौकरी करते हैं कि आपकी स्वच्छता देखकर मालिक भी खुश रहेगा।
इसके विपरीत यदि आप गंदे कपड़े पहनेंगे तो लोग आपसे दूरी बनाए रखेंगे। कोई आपसे बात करना पसंद नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में आपका व्यापार ठप्प हो सकता है और यदि आप नौकरी करते हैं तो मालिक आपको इस अवस्था में देखकर नौकरी से भी निकाल सकता है। अतः गंदे कपड़े नहीं पहनना चाहिए।

2. दांत गंदे रखने वाले
जिन लोगों के दांत गंदे रहते हैं, देवी लक्ष्मी उन्हें भी छोड़ देती हैं। यहां दांत गंदे रहने का सीधा अर्थ आपके स्वभाव व स्वास्थ्य से है। जो लोग अपने दांत ठीक से साफ नहीं करते, वे कोई भी काम पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से नहीं कर पाते। इससे उनके आलसी स्वभाव के बारे में पता चलता है। अपने आलसी स्वभाव के कारण ऐसे लोग अपनी जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभा पाते। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यदि देखें तो जिसके दांत गंदे होते हैं, उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता क्योंकि गंदे दांतों के कारण उन्हें पेट से संबंधित अनेक रोग हो सकते हैं। अतः गंदे दांत होने से व्यक्ति के आलसी व रोगी होने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसलिए देवी लक्ष्मी गंदे दांत वाले लोगों का त्याग कर देती हैं।

3. ज्यादा खाने वाले
जो लोग अपनी जरूरत से अधिक भोजन करते हैं वो निश्चित तौर पर अधिक मोटे होते हैं। मोटा शरीर उन्हें परिश्रम करने से रोकता है, वहीं ऐसे शरीर के कारण उन्हें अनेक प्रकार की बीमारियां भी घेर लेती हैं। ऐसे लोग परिश्रम से अधिक भाग्य पर भरोसा करते हैं। जबकि देवी लक्ष्मी ऐसे लोगों के पास रहना पसंद करती हैं जो अपने परिश्रम के बल पर ही आगे बढ़ने की काबिलियत रखते हैं। मोटा शरीर लोगों को अधिक आलसी बना देता है। इसलिए ज्यादा खाने वाले लोगों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं। अतः जरूरत से अधिक नहीं खाना चाहिए।

4. निष्ठुर (कठोर) बोलने वाले
जो लोग बिना किसी बात या छोटी-छोटी बातों पर दूसरों पर चीखते-चिल्लाते हैं, उन्हें अपशब्द कहते हैं। ऐसे लोगों को भी देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं। जो लोग इस प्रकार का व्यवहार अपने जान-पहचान वाले, नौकर या अपने अधीन काम करने वालों के साथ करते हैं उनका स्वभाव बहुत ही क्रूर होता है। इनके मन में किसी के प्रति प्रेम या दया नहीं होती। जिन लोगों के मन में प्रेम या दया का भाव न हो वो कभी दूसरों की मदद नहीं करते और जो लोग दूसरों की मदद नहीं करते, देवी लक्ष्मी उन्हें पसंद नहीं करती। मन में प्रेम व दया हो तो ही भगवान का आशीर्वाद बना रहता है। इसलिए निष्ठुर यानी कठोर बोलने वालों लोगों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं।

5. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाले
सूर्योदय व सूर्यास्त का समय भगवान का स्मरण करने तथा शारीरिक व्यायाम के लिए निश्चित किया गया है। सूर्योदय के समय योग, प्राणायाम व अन्य कसरत करने से शरीर स्वस्थ रहता है। इस समय वातावरण में शुद्ध आक्सीजन रहती है, जो फेफड़ों को स्वस्थ रखती हैं। इसके अतिरिक्त सूर्योदय के समय मंत्र जाप कर भगवान का स्मरण करने से भी अनेक फायदे मिलते हैं। अतः सूर्योदय होने से पहले ही उठ जाना चाहिए।
सूर्यास्त के समय भी हल्का-फुल्का व्यायाम किया जा सकता है। ये समय भगवान के पूजन के लिए नियत हैं। जो लोग सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सोते हैं, वे निश्चित तौर पर आलसी होते हैं। अपने आलसी स्वभाव के कारण ही ऐसे लोग जीवन में कोई सफलता अर्जित नहीं कर पाते। यही कारण है कि सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सोने वाले लोगों को देवी लक्ष्मी त्याग देती हैं।