आखिर चुनाव में क्या बता गया नोटा
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सोलहवीं लोकसभा चुनावों में पहली बार प्रयोग किये गए चुनाव विकल्प ‘नन ऑफ द अबव’ (नोटा) के प्रयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और उसके मतदाताओं के लिए एक ऐसा अध्याय था जिसके दूरगामी परिण्ााम देखने को मिलेंगे । चुनाव में नोटा का प्रयोग चैंकाने वाले हैं। देश भर में करीब 60 लाख मतदाताओं ने इसका उपयोग किया। इतने बड़े मतदाता वर्ग की नाखुशी को राजनैतिक दलों द्वारा समझा जाना वक्त की बड़ी जरूरत माना जा सकता है। 543 संसदीय सीटों पर कुल हुए मतदान का 1.1 प्रतिशत नोटा के हिस्से में आया है। नोटा का प्रयोग सबसे अधिक पांडिचेरी में हुआ जहां पर 22 हजार दो सौ 68 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।
Saturday, May 24, 2014
Monday, January 6, 2014
राष्ट्र बड़ा या राजनीति
राष्ट्र बड़ा या राजनीति ।अब यही प्रश्न जनमानस के मंथन के लिए सबसे अहम है। लंबी लड़ाई और बलिदान के बाद हमने आजादी पाई और गांधी,पटेल सरीखे नेताओं की कथनी और करनी से हमने एक संप्रभु राष्ट्र का निर्माण किया। लेकिन उस जंग और कुर्बानी पर श्नै-श्नै राजनीतिज्ञों ने तुष्टिकरण का धीमा जहर भरना शुरू किया। जिससे ना केबल देश का साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ा बल्कि देश की अस्मिता का भी चीर हरण हुआ। देश भाषा,समुदाय,समृद्धि,संस्कृति व क्षेत्र के नाम पर नफरत की आग पनपने लगी है। एक दूसरे को लोग संदेह व नफरत की निगाह से देखने लगे हैं।
इसी क्रम में देश में उभरी एक नई पार्टी के एक जिम्मेदार नेता द्वारा यह कहा जाना कि 'कश्मीर के लोगों की सहमति के बगैर वहां आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना की तैनाती नहीं होनी चाहिए। इस पर जनमत संग्रह कराया जा सकता है।Ó आग में घी का ही काम करेगा। क्या कश्मीर भारत से अलग है।
देश के अंदर सेना तैनाती के फैसले पर जनमत संग्रह का सवाल ही नहीं है। वरना लोकतंत्र खतरे में होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे लोकप्रिय फैसलों और जनमत संग्रह से तय नहीं होते हैं।
हालांकि भाजपा और कांग्रेस ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सीधे तौर पर जनमत संग्रह का विरोध किया है। लेकिन इन पार्टी नेताओं को भी यह देखना होगा कि जब उनकी बारी आए तो वह भी राम-रहीम,मंदिर-मस्जिद जैसे तुष्टिकरण की राजतीति का पासा ना फेकें।
राजनेताओं को यह मंथन करना होगा कि हम जिस भूमि पर राजनीति कर रहे हैं हम उसके स्वामी नहीं बल्कि संरक्षक हैं जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने जाति,धर्म,सम्प्रदाय को भुलाकर अपना एक मात्र लक्ष्य बनाया था भारत मां की आजादी,और उन्होंने उसे लेकर दिखा दिया। अब कम से कम हम उसे एकता और भाईचारा के सूत्र में पिरोकर तो रखें।
Saturday, September 7, 2013
जब मस्तिष्क में भटकाव आएगा तो दुष्कर्म जैसी घटनाएं होंगी
धर्म के नाम पर ढ़ोंग
देखिए जब मस्तिष्क में भटकाव आएगा तो दुष्कर्म जैसी घटनाएं होंगी। इसके लिए कोई कौम जिम्मेदार नहीं है। सतानत संस्कृति में अष्टांगिक मार्ग के बारे में बताया गया है--यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,योग,ध्यान और समाधि। इस पर गौर करे तो कहीं भी भौतिकवादिता का लेसमात्र भी नहीं मिलेगा। अगर संत हैं तो खुख,सुविधा क्यों। संतों की आभा ही झलकती है। ऐसे में हम ही मुर्ख हैं कि उनके बहकाबे में आकर सर्वस्व लुटा बैठते है। अब इन बाबाओं,मुल्लाओं व पादरियों के कारनामें दुनियां में उजागर हो चुके है। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के खानसाहिब में स्थित धार्मिक केंद्र में सेक्स करके लड़कियों का शुद्धिकरण करने वाले कश्मीरी मौलवी को गिरफ्तार किया गया है। इस केंद्र में धर्म से जुड़ी शिक्षा दी जाती है, वो भी सिर्फ लड़कियों को। 500 लड़कियों से भरे इस संस्थान में धर्म की आड़ में हवस का खेल पिछले करीब 4 साल से चलता रहा। असल में यहां का स्वयंभू बाबा सैय्यद गुलज़ार का जिस लड़की पर दिल आ जाता, वो उसे उच्च धार्मिक शिक्षा देने की बात करता और कहता, "उच्च कोटि की दीक्षा प्राप्त करने के लिये तुम्हें शुद्ध होना पड़ेगा।" जिस बाबा के प्रवचन हर रोज लाखों लोग टीवी चैनलों पर सुनते हों, जिनके अखबारों में विज्ञापन लगते हों और आये दिन शिविरों का आयोजन होते हों, उसके बहकावे में आना कितना आसान होगा, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। शुद्धिकरण के नाम पर वो बाबा लड़कियों को कमरे में अकेले बुलाता और उन्हें निर्वस्त्र करता और लंबे समय तक फोरसेक्स करने के बाद उनके साथ बलात्कार करता। यह सब होता था हुज़रा-ए-पाक यानी उसके पर्सनल चैम्बर में। खास बात यह है कि इस बात का पता उसके संस्थान में सिर्फ उसे और उसकी एक असिस्टेंट शकीला बानो को था। असल में जब भी कोई लड़की पढ़ने आती, तो शकीला बानो उस लड़की की काउंसिलिंग करती और कहती कि अगर तुम्हें ज्ञान का असीम भंडार प्राप्त करना है, तो पीर साहब की सेवा करनी होगी। यहां पर 'पीर साहब' वही सैय्यद गुलजार है। इस बाबा के रैकेट का खुलासा तब हुआ जब उसी के एक शिष्य इम्तियाज अहमद सोफी ने उसे एक शिष्या से यौन संबंध स्थापित करते देख लिया। उसने तुरंत पुलिस को सूचना। पुलिस ने संस्थान पर दबिश मारी और सैय्यद को गिरफ्तार कर लिया। बडगाम के एसपी उत्तमचंद के अनुसार गुलजार के दो साथियों की अभी तलाश की जा रही है। साथ ही पीड़ित लड़कियों से बयान रिकॉर्ड किये गये हैं और कुछ के बयान अभी रिकॉर्ड किये जाने हैं।
वहीं आशाराम को भी इसी तरह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया जबकि कुछ दिन पहले केरल में एक पादरी को भी गिरफ्तार किया गया। कुल मिलाकर देखा जाय तो साफ जाहिर है कि हर कौम में धर्म का चोला पहने ऐसे अनेक भेड़िये हैं जों भोली भाली जनता को पहले फंसाती है और बाद में उसका शारीरिक और मानसिक दोहन करती है।
Friday, August 30, 2013
8000 person in que for go to planet mars
Tue planet and for settling on the number of occupants is increasing rapidly . So far, more than 8,000 Indians have book your seat for Tue . " One Ó MARS project start-to- body human colony on Mars Tue to 2023 Forest intention is to settle down . Those who wish to go on Tue just have to register by visiting its website .
So far 8107 has been the application . With this data , India has become the world's fourth largest country where the inhabitants would live forever on Tue . One project in March Dogra said Ashima enrollment of 37 852 applicants in the top 10 countries with the U.S. is at the forefront . Followed by China ( 13 124 ) , Brazil ( 8686 ) , India ( 8107 ) , Russia ( 7138 ) , UK ( 6999 ) , Mexico ( 6771 ) , Canada ( 6593 ) , Spain ( 3,621 ) and the Philippines ( 3516 ) is followed . The last date for registration is August 31 this year . Nearly 165,000 people have applied this thinking that it would be the first human being living on planet Tue . He has become quite famous in March forests mission . People from more than 140 countries are considering a life in another planet . First post on Tue mark and wanted to spend my life will encourage future generations .
Saturday, July 20, 2013
जीवन मे कैसे सफल हों
ऊँचे लक्ष्य को पाने के लिए ऊँची छलाँग नहीं लगाई जा
सकती बल्कि छोटी-छोटी सीढ़ियाँ चढ़कर ही वहाँ पहुँचा
जा सकता है। आप भी अपनी प्रतिभा को ऊँचाइयों तक
पहुँचाने के लिए इन छोटी-छोटी सीढ़ियों से रास्ता
तय कीजिए।
विद्वान कहते हैं, "पानी की छोटी-छोटी बूँदों और
रेत के छोटे-छोटे कणों द्वारा ही विशाल सागर का
निर्माण होता है। इसी तरह छोटे-छोटे मिनटों, भले
ही वे प्रथम दृष्टि में महत्वहीन नजर आते हैं,
द्वारा विशाल युगों का निर्माण निरंतर होता रहता
है।" परंतु सरल से नजर आने वाले इस कथन की गहराई में
बहुतेरे अधीर युवा जाना ही नहीं चाहते और इस तरह
उनकी कई अभिरुचियाँ एवं नैसर्गिक क्षमताएँ
फलने-फूलने के बजाय दिमाग के किसी कोने में सिमटकर
रह जाती हैं। इसके विपरीत जो लोग अपने लक्ष्य से संबंधित
छोटे-छोटे अवसरों को भी बारीकी से पहचानकर समर्पित
भाव से अपनी संपूर्ण ऊर्जा, बुद्धि और विवेक उसमें
लगा देते हैं, वे अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए
छोटी-छोटी सीढि़यों का निर्माण निरंतर करते जाते
हैं। इसी कतार में शामिल कोई न कोई सीढ़ी इनके
भाग्योदय की भी वजह बन जाती है।
एक बात हमेशा याद रखिए कि दक्षता, प्रयास, अभ्यास और
प्रयोगशीलता का ही परिणाम है। जब आप तयशुदा लक्ष्य
से संबद्ध योजना को अमलीजामा पहनाकर प्रयासों की
लड़ी बनाते हैं, तब आपका हर प्रयास आपके दामन में
अनुभव के कई बेशकीमती मोती छोड़ता जाता है और शनै:
शनै: इनका खूबसूरत संयोजन आपके हुनर को निखारकर
आपकी शख्सियत में चार चाँद लगा देता है।
इसके विपरीत जब-जब आप अपने आलस्य, टालमटोल या खुद
को कमतर आँकते हुए अवसरों की उपेक्षा कर बैठते
हैं, तब-तब आप किस्मत की न जाने कितनी कुंजियों से
वंचित रह जाते है। सफलता छोटे-छोटे प्रयासों से ही
मिलकर बनती है।
इसलिए चौकन्ने होकर अपने लक्ष्य से संबद्ध अवसरों
की महीन पदचाप को सुनते रहिए और हर अवसर का मनोयोग
से स्वागत कीजिए, क्योंकि छोटे-छोटे प्रयासों की
ये लडि़याँ ही आपका पथ प्रशस्त कर आपको मंजिल तक
पहुँचा देंगी।
Friday, July 19, 2013
पाकिस्तान में हिंदू युवतियां सबसे ज्यादा असुरक्षित
इस्लामाबाद, आइएएनएस : पाकिस्तान में हिंदू युवतियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था द्वारा तैयार की गई रपट के मुताबिक पाकिस्तान में हिंदू युवतियां दुष्कर्म की सबसे ज्यादा शिकार हो रही हैं। मुल्क में ईसाई, अहमदिया और शिया समुदायों की स्थिति भी बदतर है।
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गठित अमेरिकी आयोग की रपट के मुताबिक पाकिस्तान में पिछले 18 महीनों में हिंदू युवतियों के साथ दुष्कर्म की सात घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी दौरान हिंदू समुदाय पर हमले की 16 वारदातों में दो लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी आयोग की रपट के मुताबिक इन 18 महीनों में सिख समुदाय पर भी तीन हिंसक हमले किए गए। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह रपट 'पाकिस्तान धार्मिक हिंसा प्रोजेक्टÓ के नाम से तैयार की गई है।
हिंदू समुदाय के बाद सबसे ज्यादा ईसाई युवतियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आई हैं। निर्धारित अवधि में पांच ईसाई युवतियों के साथ दुष्कर्म किया गया। पिछले डेढ़ साल में इस समुदाय पर &7 हमले किए गए जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और &6 घायल हो गए। रपट के मुताबिक पिछले 18 महीनों में विभिन्न सामुदायिक गुटों के बीच हिंसा की 20& घटनाएं हुईं, जिनमें 717 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में सबसे ज्यादा (6&5) शिया मुस्लिम थे।
अब बताइए कि किस प्यार-मुहब्बत की बात करें पड़ोसी से जो इस तरह हमारे कौम की आबरू को लूट -खसोट रहा है।
Thursday, May 2, 2013
the death of sarabjit is diplomatic defeat
सरबजीत की मौत पर फूटा देश का गुस्सा
सरबजीत को पाकिस्तान ने आखिर मौत की सजा दे ही दी। मानवीय आधार पर नरमी की अपीलों को दरकिनार कर पाक ने न तो उन्हें रिहा किया और न ही इलाज के लिए बाहर भेजने की जहमत उठाई। पाकिस्तान के इस रवैये पर भारत ने सख्ती दिखाते हुए इसे भारतीय नागरिक की हत्या करार दिया है। लाहौर की जेल में 26 अप्रैल को जानलेवा हमले के शिकार हुए सरबजीत की बुधवार देर रात जिन्ना अस्पताल में हुई मौत के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि इस अपराध के दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए। भारत ने संकेत दे दिए हैं कि मौजूदा हालात में पाक के साथ बातचीत की प्रक्रिया लडख़ड़ा चुकी है। एयर इंडिया के विशेष विमान से सरबजीत के शव को भारत लाने के इंतजामों के साथ ही प्रधानमंत्री ने परिजनों को 25 लाख रुपये की सांत्वना राशि देने का भी एलान किया।
वहीं सरबजीत की मौत की खबर सुनकर देश के कई घरों में मातम सा माहौल है। किसी की मां बीमार पड़ गई है तो किसी की पत्नी के आंखों से आंसू नहीं थम रहे। कुछ बेसुध हो गए हैं तो बहुत से लोग ईश्वर की आराधना में जुट गए हैं। ये ऐसे परिवार हैं जिनका कोई न कोई पाकिस्तान की जेलों में बंद और परिजनों को अब उनकी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। जबकि इस मामले पर सरकार के स्तर पर नाराजगी जताई गई, तो संसद में भी सियासी दलों का गुस्सा फूटा। इस बीच, सरबजीत की मौत के बाद विदेश सचिव रंजन मथाई ने पाकिस्तानी समकक्ष जलील अब्बास जिलानी से भी घटनाक्रम पर बात की। सरबजीत के मेडिकल बुलेटिन पर भारत में भी लगातार निगरानी हो रही थी। लाहौर के जिन्ना अस्पताल में तैनात दो भारतीय राजनयिकों को सुबह व रात 10 बजे मिलने वाले मेडिकल बुलेटिन दिल्ली में भी चिकित्सकीय टीम के साथ साझा किए जा रहे थे। इसके आधार पर ही पाक के आगे सरबजीत को बेहतर इलाज के लिए भारत या अन्य किसी तीसरे देश में भेजने का भी प्रस्ताव रखा गया था। सरबजीत की मौत पर देशवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल से लेकर जम्मू-कश्मीर तक लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए। पाकिस्तान का झंडा जलाया तो कैंिडल मार्च भी निकाला। प्रदर्शनकारियों ने लापरवाही बरतने पर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पंजाब में शुरू से ही सरबजीत की रिहाई की मांग कर रहे लोग सदमे में हैं।
खैर जो भी हो एक उच्चस्तरीय रणनीत के तहत पाकिस्तान ने सरबजीत को मौत की नींद सुला दी जो भारतीय कूटनीति की सशक्त पराजय है।
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